Sunday, February 26, 2012

होली की हार्दिक बधाई



बिहारी बिहारिणी की रे मोपे यह छवि बरनी न जाये 
रंग महल में होली खेलें, अंग अंग रंग छु छाए 
तन मन मिले जुले मृदु रस में, आनंद उर न समाये 
श्री हरिदास ललित छवि निरखें, सेवत नव नव भाये 

हमारे श्री धाम वृन्दावन के रसिक सम्राट, रसिक चक्र चूडामणि, परम श्रधेय आचार्य स्वामी श्री हरिदास जी महाराज ने इस पद की रचना की. वो युगल सरकार की होली लीला का अपने ध्यान में दर्शन कर रहे है और सबसे पहले स्वामी जी यही कह रहे है कि मै श्यामा श्याम की उस छवि का वर्णन नहीं कर सकता. वो रंग महल में होली खेल रहे हैं और उनका अंग अंग रंग से भीगा हुआ है. स्वामी जी कहते हैं कि उनका तन और मन पुलकित हो रहा है और इस छवि को देख के स्वामी जी को इतना आनंद हो रहा है कि इस आनंद को अपने ह्रदय में समेट नहीं पा रहे हैं. 

स्वामी जी के इस पद के भाव तो इतने गंभीर हैं की उन्हें इस लेख की सीमओं में बाँध पाना असंभव है. वो नित्य वृन्दावन (निधिवन) में इस लीला का दर्शन कर रहे हैं और स्वयं इस बात को मानते हैं इस छवि का वर्णन नहीं किया जा सकता. निधिवन कोई सामान्य स्थल नहीं है, वो तो प्रेम का सिन्धु है और राधा कृष्ण इस प्रेम सिन्धु की एक बूँद के रूप में ब्रज में प्रकट हुए हैं. वो यमुना के तीर पे और कुंजों में जब नृत्य करते हैं, तो वो सब भक्तों के लिए एक खुली तिजोरी के समान है जिसमे ठाकुर जी खुद कहते हैं की आओ मुझे छुओ, मुझे अनुभव करो और मेरे साथ नाचो, तुम मुझे प्यारे हो, तुम मेरे हो, आके लूट लो मुझे. तो इस होली पर चलिए ठाकुर जी के रंग में अपने आप को रंग लें और उनके कृपा के महासागर में डूब जाएँ.

अब ज़रा इस बात को जान ले की श्री धाम वृन्दावन में यह दिव्य त्यौहार किस प्रकार से मनाया जाता है. प्रभु के धाम में होली ५ दिन तक खेली जाती है. फाल्गुन शुक्ला एकादसी (आनोला एकादसी) से प्रारंभ होकर फाल्गुन की पूर्णिमा तक ठाकुर जी होली खेलते हैं. वैसे तो होली का रंग बिहारी जी पे बसंत पंचमी के दिन ही चढ़ जाता है. बसंत पंचमी के दिन पहली बार बिहारी जी के मंदिर में शयन आरती के वक़्त गुलाल उड़ाया जाता है. और फाल्गुन के तो पुरे महीने में ठाकुर जी के गाल गुलाल से सुशोभित होते है. चटकीले रंग की पोषक पहने, बांकी पगड़ी धारण किये हुए ठाकुर जी ऐसे मुस्कुराते हो मनो मोहिनी ने अपना डेरा डाल लिया हो. उनके माथे मर एक बड़ी सी बिंदी, और उसके नीचे वो मोटे मोटे कजरारे कजरारे नैन, जिनमे वही शरारत भरी हुई रहती है. और एकादसी से तो पूर्ण रूप से होली शुरू हो जाती है और होलिका दहन तक मनाई जाती है. इस बीच ठाकुर जी अपना कमरा छोड़ के भक्तो के पास आ जाते हैं जहाँ उनके लिए एक प्यारा सा चांदी का घरोंदा बनाया जाता है और ठाकुर जी वहां से खूब रंग बरसाते है. ठाकुर जी सफ़ेद रंग की सुंदर पोषक पहन के अपने दर्शन खोलते है और शाम तक बिहारी जी के कपडे हर रंग में रंग जाते है. रंग से सराबोर ठाकुर जी की छवि का क्या नज़ारा होता होगा, इसका वर्णन मै क्या कोई भी नहीं कर सकता, उसका तो केवल दर्शन ही किया जा सकता है. ठाकुर जी को लगाये जाने वाला रंग टेसू के फूलों को उबाल कर तैयार किया जाता है. मंदिर के गोस्वामी इस रंगीन पानी को भक्तो पर डालते रहते है. इसके अतिरिक्त चन्दन और गुलाब का पानी भी भक्तो पर लुटाया जाता है. सूखे रंग मंदिर में पूरा दिन उड़ते रहते है और भक्त केवल एक ही धुन गाते रहते है : होली है ; होली है ; होली है. भक्तों की टोलियाँ मंदिर में होली के रसिया गाते हैं. आप सब भी पूज्य गुरुदेव के साथ मिलकर गाते ही होंगे, पूज्य गुरुदेव ने अपनी सुमधुर आवाज़ में कितने सुंदर भजन गाये हैं.


आये फाग खेलन, गोपाल बरसाने में 
गावे ख्याल, देदे ताल उर हर्षत है
इत ते किशोरी गोरी, सखियों के ऊथ महान
लेके अबीर पे कपोल पर्सत है 
कंचन पिचकारी मारी ताकि बिहारी ने 
लाल बलबीर प्रति अंग दर्शत है 
छतन ते, छज्जन ते, झरोखन ते, मोखन ते, 
आज नन्द लाल पे गुलाल बरसत है

होलिका दहन के अगले दिन, अर्थात चैत्र कृष्ण प्रतिपदा को दुल्हेंदी कहते है. पूरे देश में तो होली का आनंद इसी दिन मनाया जाता है, पर जैसे हमारे ठाकुर जी बांके है उसी तरह उनका त्यौहार मनाने का समय भी बांका ही है. जब पूरा देश होली खेलना शुरू करता है, उस दिन ठाकुर जी की होली विश्राम की ओर बढ़ जाती है. इस दिन चांदी के घरोंदे की जगह सोने का एक विशाल सिंहासन ले लेता है जिसपर ठाकुर जी विराज कर भक्तो को देखते है. रिवाज़ के अनुसार बांके बिहारी जी होली नहीं खेलते. मंदिर के परदे जो अब तक रंग में सन चुके होते हैं, उन्हें भी उतार कर नए परदे लगा दिए जाते है. इस दिन मंदिर के गोस्वामी भी भक्तो पर रंग नहीं डालते और भक्त अपने साथ ही गुलाल ले जाते हैं और आपस में एक दूसरे के साथ होली खेलते हैं. ठाकुर जी फूल डोल में बैठे बैठे मुस्कुराते है.


आप सब भक्तों को हमारे परिवार की ओर से और पूज्य गुरुदेव की ओर से होली कि बहुत बहुत शुभकामना. यह त्यौहार आपकी जिंदगी में रंग भर दे, आप सब स्वास्थ्य से तंदरुस्त रहे, अपने अपने कार्यों में व्यस्त रहे और बिहारी जी की मस्ती में मस्त रहे. हमारी यही मंगल कामना है. 

~~~~~ श्री राधे ~~~~~ होली की हार्दिक बधाई ~~~~~ श्री राधे ~~~~~

Saturday, January 14, 2012

हम परदेसी...जय श्री राधे कृष्णा...

---जय श्री राधे कृष्णा---

हम परदेसी फ़कीर... काउ दिन याद करोगे...
हम परदेसी फ़कीर... काउ दिन याद करोगे...


भज ले श्री रघुबीर... भज ले श्री रघुबीर 
कोई दिन याद करोगे...

हम परदेसी फ़कीर... काउ दिन याद करोगे...
हम परदेसी फ़कीर... काउ दिन याद करोगे...

इस सत्संग को भूल न जाना
सत्संग में तुम प्रतिदिन आना

इस सत्संग को भूल न जाना
सत्संग में तुम प्रतिदिन जाना
करलो अरज मंजूर... कोई दिन याद करोगे


हम परदेसी फ़कीर... काउ दिन याद करोगे...
हम परदेसी फ़कीर... काउ दिन याद करोगे...

कोई दुखिया दुःख से रोये
कोई सुखिया सुख से सोये
साधू भाजे रघुबीर... कोई दिन याद करोगे


हम परदेसी फ़कीर... काउ दिन याद करोगे...
हम परदेसी फ़कीर... काउ दिन याद करोगे...

मात-पिता और भाई बहिना भूल चूक की माफ़ी देना
मात-पिता और भाई बहिना भूल चूक की माफ़ी देना
में हू तुच्या शरीर... कोई दिन याद करोगे

हम परदेसी फ़कीर... काउ दिन याद करोगे...
हम परदेसी फ़कीर... काउ दिन याद करोगे...

भज ले श्री रघुबीर... भज ले श्री रघुबीर
कोई दिन याद करोगे...




Saturday, December 3, 2011

Mok Soda Nahi Lagada Shyam Bina

Mok Soda Nahi Lagada Shyam Bina 

AaKh Sodi Nahi Prabhu Dharas Bina 

Chahe Lakh Lakh Kajra Paiye 
Mok Soda Nahi Lagada Shyam Bina 

Kaan Sode Nahi Prabhu Ki Katha Bina
Ho Chahe Lakh Lakh Kudala Paiye
Mok Soda Nahi Lagda Shyam Bina

Kaya Sodi Nahi Lagadi Bhajan Bina
Chahe Mal Mal Roj Nahaiye
Mok Soda Nahi Lagada Shyam Bina

Pag Sodi Nahi Lagada Virindavan Jaye Bina
Ho Chahe Jag Sara Ghum Aayiye
Mok Soda Nahi Lagada Shyam Bina

"---JAI SRI RADHE KRISHNA---"

Tuesday, November 29, 2011

Saturday, November 12, 2011

Chahe Chod De Baaki Kaam Aaj Tu Aadhe Aadhe

Tu Jap Le Man Se Naam Aaj Sri Radhe Radhe
Chahe Chod De Baaki Kaam Aaj Tu Aadhe Aadhe

Sri Radhe Naam Se Apne Man Ke Taar Milade
Chahe Chod De Baaki Kaam Aaj Tu Aadhe Aadhe

Tu Jap Le Man Se Naam Aaj Sri Radhe Radhe
Chahe Chod De Baaki Kaam Aaj Tu Aadhe Aadhe

Aapne Bhakt Se Maan Na Karake Jo Karuna Barsati
Prem Swarupa Kripa Mayi Ma Shyam Ki Raha Batati

Tu Aapne Man Ko Prem Ki Iis Dhara Me Duba De
Chahe Chod De Baaki Kaam Aaj Tu Aadhe Aadhe

Ho Jayenge Magan Prabhu Ji Maa Jasuda Ke Chaiya
Sri Radha Ki Dhar Me Chod De Aapni Jeevan Naiya

Kar Bhajan Bhavana Bhakti Ke Majbot Iirade
Chahe Chod De Baaki Kaam Aaj Tu Aadhe Aadhe

Sri Radhe Ka Naam Batate Hai Sab Mokch Ka Data
Me Nahi Kahata Hu Kahate Hai Saare Gyani - Gyata

Charno Me Aapne Man Ki Pavan Lagan Laga De
Chahe Chod De Baaki Kaam Aaj Tu Aadhe Aadhe

Tu Jap Le Man Se Naam Aaj Sri Radhe Radhe
Chahe Chod De Baaki Kaam Aaj Tu Aadhe Aadhe

JAI SRI RADHE KRISHNA....!!!!!

Saturday, November 5, 2011

Me to Nachhugi Bich Bazaar Rasiya


Teri Bansi Pe Jau Balihaar Rasiya
Me to Nachhugi Bich Bazaar Rasiya

Bich Bazaar Meri Bahiya Pakadona
Maan Bhi Jao Kanha Aaise Jhatako Na
Aaise Jhatako Na, Aaise Jhatako Na
Loog Chugali Karenge 100-100 Baar Rasiya
Me to Nachhugi Bich Bazaar Rasiya

Teri Bansi Pe Jau Balihaar Rasiya
Me to Nachhugi Bich Bazaar Rasiya

Ood Ke Aau Kanha Peelii Chunariya
Peelii Chunariya, oh Peelii Chunariya
Naak Me Pahanu Kanha Piyari Nathuniya
Naak Me Pahanu Kanha Piyari Nathuniya
Dongi Payal Me to Jhankar Rasiya
Me to Nachhugi Bich Bazaar Rasiya

Teri Bansi Pe Jau Balihaar Rasiya
Me to Nachhugi Bich Bazaar Rasiya

Saas Laade Chhahe Laade Jithani
Balam Laade Chhahe Laade Divrani
Balam Laade Chhahe Laade Divrani
Me to Naachugi Gughat Khol Rasiya
Me to Nachhugi Bich Bazaar Rasiya

Teri Bansi Pe Jau Balihaar Rasiya
Me to Nachhugi Bich Bazaar Rasiya


Jab Se Laagi Mohe Teri Laganaba
Teri Laganaba, haa Teri Laganaba
Bishar Gayo Mero Ghar Aur Aaganva
Me to Chood Aayi Saara Sansar Rasiya
Me to Nachhugi Bich Bazaar Rasiya

Teri Bansi Pe Jau Balihaar Rasiya
Me to Nachhugi Bich Bazaar Rasiya

JAI SRI RADHE KRISHNA......!!!!!!!!!!!

Radhe Radhe Bol , Radhe Radhe Bol Barsane main doll ki mukh se Radhe Radhe Bol

Purnima ke anant chander mandalo ko lajjeet karne wali, Jo unse bhi aadhik shobhit hai, Jinki kripa Kataksh Anant Loko ko Pavittar Karne wali hai, vey Subh-Drishti wali Kirpa mayi Shri Radha Rani Hai, To Aaiye Shri Radha Rani Ke Naamo ka Guun Gaan Kare or unki kirpa prapt kare.

Radhe Radhe Bol , Radhe Radhe Bol Barsane main doll ki mukh se Radhe Radhe Bol

Radhe Radhe Bol , Radhe Radhe Bol Barsane main doll ki mukh se Radhe Radhe Bol


Radhe Radhe Bol , Radhe Radhe Bol Barsane main doll ki mukh se Radhe Radhe Bol

Radhe Radhe Bol , Radhe Radhe Bol Barsane main doll ki mukh se Radhe Radhe Bol

RADHE RADHE RADHE RADHE Radhe jai Shri Radhe

RADHE RADHE RADHE RADHE Radhe jai Shri Radhe

RADHE RADHE RADHE RADHE Radhe jai Shri Radhe
RADHE RADHE RADHE RADHE Radhe jai Shri Radhe


Radhe Radhe Bol , Radhe Radhe Bol Barsane main doll ki mukh se Radhe Radhe Bol

Radhe Radhe Bol , Radhe Radhe Bol Barsane main doll ki mukh se Radhe Radhe Bol


1. Shri Barsano Dhaam Rangilo- Shri Barsano Dhaam Rangilo-

Dhaam Rangilo Brij Dham Rangilo- Dhaam Rangilo Brij Dham Rangilo

Radhe Hai Anmol Ki Mukh Se RADHE RADHE Bol
Radhe Hai Anmol Ki Mukh Se RADHE RADHE Bol

Radhe Radhe Bol , Radhe Radhe Bol Barsane main doll ki mukh se Radhe Radhe Bol


2. Brahma-Chal parvat maan Bhayo, Brahma-Chal parvat maan Bhayo,

Brahma-Chal parvat maan Bhayo, Brahma-Chal parvat maan Bhayo,

Radhe Karat Kilol Ki much se RADHE RADHE Bol
Radhe Karat Kilol Ki much se RADHE RADHE Bol

Radhe Radhe Bol , Radhe Radhe Bol Barsane main doll ki mukh se Radhe Radhe Bol

3. Braj Ki Galian Mohan Khele, Braj Ki Galian Mohan Khele,

Mohan Khele Sawariya Khele, Mohan Khele Sawariya Khele,

Or Gwaalan Ko Toll ki much se RADHE RADHE Bol
Or Gwaalan Ko Toll ki much se RADHE RADHE Bol


Radhe Radhe Bol , Radhe Radhe Bol Barsane main doll ki mukh se Radhe Radhe Bol


4. Gehwar Vaan ki lata patan mai, Gehwar vaan ki lata patan mai
Gehwer Vaan ki lata patan mai, Gehwer vaan ki lata patan mai

Pakshi Bole RADHE RADHE bol ki much se RADHE RADHE bol
Pakshi Bole RADHE RADHE bol ki much se RADHE RADHE bol


Radhe Radhe Bol , Radhe Radhe Bol Barsane main doll ki mukh se Radhe Radhe Bol

JAI RADHE JAI KRISHNA.......!!!!!!!!!!
JAI HO VIRINDAVAN DHAM......!!!!!!!!!!
JAI SRI RADHE KRISHNA......!!!!!!!!!!!

Sri Radhe Gopal Bhaj Man Sri Radhe


Bah Aur Ki Aasha Kare Na Kare
Jise Aas Yasvi Hari Naam Kahe
Use Surag Se Mitra Prayojan Kya
Nit Baasi Jo Gokul Dham Ka Hai
Bas Sarthak Janam Usi Ka Yaha
Hare Krishna Jo Chahakar Shyam Ka Hai...!!!
Bina Krishna Ke Darshan Jag Me
Yah Jeevan Hi Kis Kaam Ka Hai....!!!!!!!!

Sri Radhe Gopal Bhaj Man Sri Radhe
Sri Radhe Jai Shyam Radhe

Radhe Shyam Rato Umariya Thodi Hai
Thodi Hai Pyare Thodi Hai
Radhe Shyam Ratoo Umariya Thodi Hai

JAI SRI RADHE KRISHNA....!!!!!!!

One Real Enemy......!!!!!‏

JAI SRI RADHE KRISHNA......!!!!!!

Aaj Jo Me Aapko...Aap Sabhi Logo Ke Sabase Bade Dusman Ke Baare Me Batane Ki Agya Cahuga...Bo Dusman Jo Hame Parmatma Se Milane Ko Rokta Hai...Jo Sabasi Badi Banda Hai.....!!!! Uske Baare Me Aapko Kuch Pankatiya Suna Raha Us Se Aap Samajhe

Man Se Bada Bahrupi Na Koi
Pal-Pal Rachita Swang Nirale
Maya-Mamta Me Uljha Rahe
Bo Jo Pad Jaye Man Ke Paale

Man Ke Bahkave Me Na
Man Raha Bhulaye Bhram Me Daale
Tu Iis Man Ka Daas Na Ban
Iis Man Ko Aapna Daas Bana Le

JAI SRI RADHE KRISHNA......!!!!!!!!

Kya Aap Sabhi ko Kisi aur Ki Chaha Hai.......!!!!!


JAI SRI RADHE KRISHNA......!!!!!!!!!!!

Jag Dosi Kahe Kitra Bhi Hame
Iisaki Ham Ko Paribha Nahi
Prabhu Prem Payog Adhyam Bada
Iis Me Sab Aate Tha Nahi

Hasate Hasate Yah Jeevan Hai
Par Mukh se Nikale Aaha Nahi
Hame Chaha Hai Sri Radhe Krishna Ke
Darshan Ki Hame Aur Kisi Ki Chaha Nahi

Kya Aap Sabhi ko Kisi aur Ki Chaha Hai.......!!!!!

JAI SRI RADHE KRISHNA......!!!!!!

Thursday, November 3, 2011

गोपाष्टमी एवं अक्षय नवमी

जो प्रणत होए मेरे ठाकुर को
वा करे विपिन को वास
और दीप जलें आनंद मिले
ऐसो या कार्तिक मास

पद्मपुराण और स्कन्दपुराण में श्री बांके बिहारी जी महाराज ने स्वयं कार्तिक के पवित्र मास के महात्म का बहुत ही सुंदर ढंग से विस्तार किया है. उन्होंने कहा है कि जो एक बार इस मास में ल्रभु को प्रणत हो जाता है, उसे प्रभु हमेशा अपने चरणों का दास बना लेते हैं. वैसे तो इस मास में भक्त अनेक नियम, व्रत आदि लेते हैं, परन्तु पद्मपुराण के अनुसार यदि कोई व्यक्ति कार्तिक मास में केवल सूर्योदय से पहले स्नान कर ले तो उसे प्रत्येक तीर्थ में स्नान करने का फल प्राप्त होता है. प्रभु ने अपने बाल्यकाल में अनेक लीलाएं कार्तिक मास में ही की थीं. तो उखल बंधन लीला कार्तिक के इसी पवित्र मास में हुई थी. परभू माँ के प्रेम के बंधन में बांध गए थे. इसलिए इसे दामोदर मास भी कहा जाता है और ब्रज वासी ऐसा मानते है कि जो इस मास में प्रभु कि भक्ति करता है तो बिहारी जी उसके प्रेम के बंधन में भी बांध जाते हैं और यदि कोई शक्ति भगवन को बांध सकती है तो वेह है केवल भक्तो के आंसुओ कि धारा.

कार्तिक के इस पवित्र मास में प्रभु ने एक और भी बड़ी सुंदर लीला की थी. हम सब जानते है कि प्रभु को गौएँ बहुत प्रिय है. तो भक्तों हमारे कन्हैया कार्तिक शुक्ल अष्टमी को ही पहली बार गौएँ चराने के लिए गौ चारण वन गए थे और उन्होंने वहाँ अपनी मुरली से गौओं को भी सम्मोहित कर दिया था. और इसी दिन को हमारे ब्रज में गोपाष्टमी के नाम से जाना जाता है.

गोपाष्टमी के ठीक अगले दिन अर्थार्थ कार्तिक शुक्ल नवमी को अक्षय नवमी के रूप में मनाया जाता है. हमारे शास्त्रों ऐसा लिखा हुआ है कि त्रेता युग इसी दिन से प्रारंभ हुआ था. और इसी दिन सूर्य नारायण ने माँ दुर्गा कि उपासना की और उन्होंने माँ ने असंख्य उपहार भेंट में दिए जिन्हें हम आज सौर उर्जा के रूप में प्रयोग कर रहे हैं. अक्षय नवमी के दिन भक्त लोग मथुरा-वृन्दावन कि युगल परिक्रमा लगाते हैं. सूर्योदय के पूर्व उठकर सभी भक्त एवं रसिक श्री यमुना जी का स्नान करके परिक्रमा प्रारंभ करते हैं और ब्रज रज को अपने मस्तक से लगाकर नंगे पाँव संध्या तक परिक्रमा पूर्ण करके उसे बिहारी जी के श्री चरणों में समर्पित करते हैं. ब्रज रज को अपने मस्तक पर लगाने का एक अर्थ यह भी है कि आप आपने लिए मुक्ति के द्वार खोल रहे हैं क्यूंकि जब मुक्ति ने अपनी मुक्ति पूछी थी प्रभु से तो भगवन ने उसे भी यही कहा था कि ब्रज रज को अपने मस्तक पर लगाने से मुक्ति भी मुक्त हो जाती है.

वृन्दावन कि गलिन में मुक्ति पड़े बिलखाये
मुक्ति कहे गोपाल सों तू मेरी मुक्ति बताये
पड़ी रह्यो या गलियों में यहाँ पंथी आवे जाएँ
ब्रज-रज उड़ मस्तक लगे, तो मुक्ति मुक्त है जाये



तो भक्त जन इसी ब्रज-रज को अपने मस्तक पर लगाये हुए श्री धाम वृन्दावन के सभी प्रमुख स्थानों के दर्शन करते हुए मधु पूरी मथुरा में प्रवेश करते हैं. मथुरा में भी सर्व-प्रथम सब विश्राम-घाट पे यमुना जी का स्नान करते हैं और फ़िर मथुरा में मंदिरों के दर्शन करते हैं. अंत में जब सब ब्रज-रज से अपने शरीर को सुसज्जित कर लेते है, ब्रज-रज से अपना श्रृंगार करते हैं और वृन्दावन लौटते हैं और बाँके बिहारी जी को अपनी यात्रा समर्पित हैं. वैसे तो इस प्रथा के लिए अत्यंत बल और सहन शक्ति कि आवश्यकता होनी चाहिए परन्तु ऐसा देखा गया है कि मेरे ठाकुर जी कि कृपा से कमज़ोर दिखने वाले भक्त भी इस परिक्रमा को बड़ी सरलता से सम्पुर्ण कर लेते हैं.

भगवान के लिए यह संभव नहीं है कि वह अपने सब भक्तों को यह सौभाग्य दें कि वे वृन्दावन में आकर परिक्रमा लगाये. परन्तु यदि आप प्रभु को याद करते रहोगे तो भगवान भी आपके प्रेम से विवश होकर आपको बुला ही लेंगे.


आप सब पर राधा राणी अपनी दया बनाये रखे

प्रेम से कहिये
श्री राधे ! श्री राधे !! श्री राधे !! श्री राधे ! श्री राधे

जय श्री राधे कृष्ण........!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

"...........माँ..........." - "...........माँ..........."


"...........माँ..........." - "...........माँ..........."

१. ऊपर जिसका अंत नहीं उसे आश्मां कहते हैं, जहाँ में जिसका अंत नहीं उसे माँ कहते हैं.......
२. बचपन में गोद देने वाली को बुढापे में दगा देने वाले मत बनना.......
३. जिन बेटों के जन्म पर माँ-बाप ने हंसी-खुशी पड़े बांटे..... वही बेटे जवान होकर कानाफूसी से माँ-बाप को बांटे...हाय ये केसी करुणता है!
४. माँ! पहले आंसू आते थे और तू याद आती थी. आज तू याद आती है और आंसू आते हैं.
५.माँ! कैसी हो...?" इतना ही पुच उसे मिल गया सब कुछ.....
६.मंगलसूत्र बेच कर भी तुम्हें बड़ा करने वाले माँ-बाप को ही घर से निकालने वाले ऐ नौजवान! तुम अपने जीवन में अमंगाल्सुत्र शुरू कर रहे हो....
७. माँ, तूने तीर्थंकरों को जना है, संसार तेरे ही दम से बना है, तू मेरी पूजा है, मन्नत है मेरी, तेरे ही क़दमों में जन्नत है मेरी.....
८. बटवारे के समय घर की हर चीज पाने के लिए झगडा करने वाले बेटे, दो चीजों के लिए उदार बनते हैं, जिनका नाम है माँ-बाप....
९. माता-पिता क्रोधी हैं, पख्य्पाती हैं, शंकाशील हैं ये साड़ी बातें बाद की हैं. पहली बात तो ये है की....वो माता-पिता हैं.
१०. घर में वृद्ध माँ-बाप से बोले नहीं, उनको संभाले नहीं और वृधाश्रम में दान करे, जीवदय में धन प्रदान करे उसे दयालु कहना....वो दया का अपमान है.
११. जो मस्ती आँखों में है मदिरालय में नहीं, अमीरी दिल की कोई महालय में नहीं, शीतलता पाने के लिए कहाँ भटकता है मानव! जो माँ की गोद में है, वह हिमालय में नहीं....!
१२. बचपन के आठ साल तुझे अंगुली पकड़ कर जो माँ-बाप स्कूल ले जाते थे, उन माँ-बाप को बुढ़ापे के आठ साल सहारा बन कर मंदिर ले जाना... शायद थोडा-सा तेरा क़र्ज़ थोडा-सा तेरा फ़र्ज़ पूरा होगा.
१३.माँ-बाप को सोने से ना मडो, तो चलेगा. हीरे से ना जड़ो, तो चलेगा. पर उनका जिगर जले और अन्दर आँसूं बहाए, यह कैसे चलेगा?
१४. जब छोटा था, तब माँ की शय्या गीली रखता था, अब बड़ा हुआ, तो माँ की आँखें गीली रखता है. हे पुत्र! तुझे माँ को गीलेपन में रखने की आदत हो गयी है...
१५. माँ-बाप की आँखों में दो बार आँसूं आते हैं, लड़की घर छोड़े तब....लड़का मुह मोड़े तब....
१६. माँ और माफ़ी दोनों एक हैं क्योंकि माफ़ करने में दोनों नेक हैं....
१७. कबूतर को दाना डालने वाला बेटा अगर माँ-बाप को दबाये तो...उसके दाने में कोई दम नहीं....
१८. माँ-बाप की सच्ची विरासत पैसा और प्रसाद नहीं, प्रमाणिकता और पवित्रता है....
१९. बचपन में जिसने तुम्हें पाला, बुढ़ापे में उसको तुमने नहीं संभाला तो याद रखो...तुम्हारे भाग्य में भड़केगी ज्वाला
२०. माँ-बाप को वृधाश्रम में रखने वाले ऐ नौजवान! तनिक सोच कि, उन्होंने तुम्हें अनाथश्रम में नहीं रखा, उस भूल की सजा तो नहीं दे रहा है ना.....
२१. ४ वर्ष का तेरा लाडला यदि तेरे प्रेम की प्यास रखे तो पचास वर्ष के तेरे माँ-बाप तेरे प्रेम की आस क्यों ना रखें...
२२. घर में माँ को रुलाये और मंदिर में माँ को चुंदरी ओधए... याद रख... मंदिर की माँ तुझ पर खुश तो नहीं...शायद khapha jarur hogi.....!!!!

श्रीमती मनोरमा देवी जी की याद में............!!!
प्रेम से बोलो जय श्री राधे कृष्णा

Thursday, October 20, 2011



Padhaaro Radha Sang Sarkar
Khule Hai Man Mandir Ke Dwaar, Padharo Radha Sang Sarkar
Punya Smritiyaa Juta Juta Kar, Inko Khoob Sajaaya
Sundar Sapano Me Bhi Tera Iik Sandesh Na Aaya
Man Ki Vyathaa Akhiyan Me Aayi
Ban Ke Jamuna Dhaar

Padhaaro Radha Sang Sarkar

Mor Mukut Atkan Latkan Ki, Adhar Dhare Baansuriya
Peetambar Ke Phaharan Anupam, Banki Tirchhi Najariya
Hey Hari Praan Karu Nyochhavar Aaj Mohaniyaa Daar

Padhaaro Radha Sang Sarkar
Khule Hai Man Mandir Ke Dwaar, Padharo Radha Sang Sarkar

Jai Sri Radhe Krishna.......!!!!!!!!!

Tuesday, October 18, 2011

Bansi Bajaave Nandlala Gopala Mera Pahne Phoolan Ki Mala

Bansi Bajaave Nandlala Gopala Mera Pahne Phoolan Ki Mala
Mera Nandlala Mera Gopala Bansi Bajaave Mero Nanlala

O Tedhi Lakut Hai Tedha Mukut Hai
Lakut Hai Tedhi Mukut Hai Tedha
Tedha Khada Hai Kaamli Bala
Gopala Mero Pahne Phoolan Ki Mala

Mera Nandlala Mera Gopala

Kadam Ke Niiche Akhiyan Meeche
Muskaye Mero Lala
Gopala Mera Pahne Phoolan Ki Mala
Kar Murli aur Lakuti aur Ghughar Wale Baal
Aiso Hi Mere Man Baso Sada Bihari Lal
Sada Bihari Lal

Bansi Bajaave Nandlala Gopala Mera Pahne Phoolan Ki Mala

Sun Bansi Dhun Aayi Virindavan...

Sun Bansi Dhun Aayi Virindavan
aur Dekho

Jhoom Rahi Hai Brajwala Jhoom Rahi Hai Brajwala

Kyoki

Gopala Mero Pahne Phoolan Ki Mala
Bansi Bajaave Nandlala Gopala Mera Pahne Phoolan Ki Mala
Gopala Mero Pahne Phoolan Ki Mala

Jai Sri Radhe Krishna..........!!!!!!!!!!!

Jai Sri Radhe Krishna..........!!!!!!!!!!!
Jai Sri Radhe Krishna..........!!!!!!!!!!!
Jai Sri Radhe Krishna..........!!!!!!!!!!!
Jai Sri Radhe Krishna..........!!!!!!!!!!!
Jai Sri Radhe Krishna..........!!!!!!!!!!!
Jai Sri Radhe Krishna..........!!!!!!!!!!!
Jai Sri Radhe Krishna..........!!!!!!!!!!!

Sunday, October 16, 2011

JAI SRI RADHE KRISHNA: // हरि मैं तो लाख यतन कर हारी //

JAI SRI RADHE KRISHNA: // हरि मैं तो लाख यतन कर हारी //: हरि मैं तो लाख यतन कर हारी। महलन ढूंढा, गिरिबन ढूंढा, ढूंढी दुनिया सारी॥ गोलुक कुंज गली में ढूंढा, ढूंढा वृन्दावन में। डाल डाल से, फूल पा...

Friday, October 14, 2011

// हरि मैं तो लाख यतन कर हारी //

हरि मैं तो लाख यतन कर हारी।
महलन ढूंढा, गिरिबन ढूंढा, ढूंढी दुनिया सारी॥

गोलुक कुंज गली में ढूंढा, ढूंढा वृन्दावन में।
डाल डाल से, फूल पात से, जा पूछा कुंजन में।
बीती की सब कहे हरि ना अब की कहे बनवारी॥

कोई कहे श्री राम है क्या या गौरी काली मैया।
मैं कहू नहीं गोपाल हैं वो एक बन में चरावे गैया॥

उमापति परमेश्वर नहीं, ना नारायण भयहारी।
मीरा का हृदय विहारी, मीरा का हृदय विहारी॥

अंग पीताम्बर मोरे मुकुट, सर माला गले सुहावे।
बहुरूपी बड़े रूप धरे, जिस नाम बुलावो आवे॥

मीरा कहे अब लाज रखो प्रभु आवो मुरली धारी॥

Jai Sri Radhe Krishna....

Thursday, October 13, 2011

Shyam Tere Kaam Bade Achraj Bhare
Sri Krishna Gopal Govind Madhav Hari

Nath Tu To Janam Ka Chor Hai Teri Leela Ka Or Na Chhor hai
Adhi Raat ko Chori-Chori Bandhi Grah Me Aaya
Chori-Chori Chupake-Chupake Gokul Dham Ko Dhaya
Aapne Hi Ghar Pe Chori Karake Makhan Tune Khaya aur Phir Chori Karna Saare Gualo Ko Sikhalaya

Ho Ho Ho

Yumana Ke Tath Par Tune Gopiyo Ke Chiir Churaye
Preet Aa Nari Thadiya Jhoota Pream Ki Gali Khaye
Sakhiyo Ne
Teri Sakhiyo Ne Tere Naam Kya-Kya Dhare
Chori Kare Aur Bar Joori Kare
Sri Krishna Gopal Govind Madhav Hari
Sri Krishna Gopal Govind Madhav Hari
Shyam Tere Kaam Bade Achraj Bhare

Are Ho

Nag Kaliya Ko Nath Dala fun Pe Kiya Tune Niratyan
Braj Ki Rakchha hetu Utha liya Ungali pe Goverdhan
Jai Jai Goverdhan Giridhari Teri Lila Hai Niyari
Indra aur Brahma Ke Maan Bhi Hare
Sri Krishna Gopal Govind Madhav Hari
Shyam Tere Kaam Bade Achraj Bhare

Baal Rup Me Makhan Lila
Bhakto Ka Hirday Rejhane Ko
Chhachhiya Bhar Chhach Pe Naach Uthe
Mamta Ka Mool Chukane Ko
Barsane Ki Radha Se
Man Bandha Ras Barsane Ko
Do Amar Preami Dharti Pe Mile
Yaha Prem Ki Jyoti Jalane Ko

Ek Jasuda Ko Phool Gulabi
Ek Birsubhanu Ke Bisakhi Kali
Man Mohan Lalla re
Man Bhabani Lalli

Ek Makhan Ho
Ek Mishri ki Gali
Man Mohan Lalla
Man Bhabani Lalli

Koi Na Jaane Koi Na Bujhe
Iinme Sabki Preet Phaali
Man Mohan Lalla re
Man Bhabani Lalli

Jai Sri Radhe Krishna...........!!!!!!!!!